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लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part8

दयालुता का यह प्रयोजन है कि बहुत से मुठ मनुष्य नारितकता से परमात्मा का अपमान और खंडन करते और पुत्रादि के न होने या अकाल में मरने, अतिवृष्टि, रोग और दरिद्रता के होने पर ईश्वर को गाली प्रदान आदि भी… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part7

फर्रुखाबाद के पण्डितों की ओर से विज्ञापन’ दयानन्द सरस्वती के पास ये प्रश्न धर्मसभा फरूखाबाद की। ओर से भेजे जाते हैं कि आप्त ग्रन्थों के प्रमाण से इन प्रश्नों का उत्तर पत्र द्वारा धर्मसभा के पास भेज दें और यह… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part6

अर्थात यजमान कहता है हे परमेश्वर ? मेरे पशुओं की तू अरबट़ी प्रकार रखा कर कि जिस से मर दह़ों होम की सबरो दूध दही प्रताप की कमी न पड़े और सन्दान पष् हो इस प्रकार इस प्रार्थना में पशुओं… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part5

खाने से वह केवल २० मनुष्यों को एक दिन के लिए पर्याप्त होती है। इसके अतिरिक्त उसके यदि दस बठिक हुई और बछड़े भी हुए तो और अतिरिक्त लाभ होगा। जो बछड़े हुए तो हजारों स्थानों पर उनसे पृथ्वी जोतकर… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part4

अव जिन बातों को मानने में सब की साक्षी समान हो उस को मानो। क्या कोई ऐसी बात किसी ने कही कि जो सब में समान हो ? उस व्यक्ति ने उत्तर दिया कि हा महाराज ! बहुत सी बातें… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part3

ची मतवादा पास गया । या देखा है। हाथ में – शीरा हुए वह वहीं खराटा रहा है। को देखते ही वह योल उठा आ30, वडो | गणेश्वर । तर गाव। जी तुम मा यही भेजा। अब तुम 9 आओ… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)part2

पं० अंगद शास्त्री की ओर से स्वामी जी के पत्र का उत्तर जय जय त्रिजटा परमात्मने नमः श्रीयुत दयानन्द सरस्वती समीपे स्वमत कुशलपूर्वक मद्विज्ञापनम् ।। आपका पत्र ३ ॥ बजे मेरे पास पहुंचा । लेखाशय प्रकट हुआ ! आपको ऐसा… Continue Reading →

लज्जा का परित्याग(laja ka prityag)

आपने तीसरी चौथो दफा का अद्भत आशय लिखा है कि उभय पक्ष के षचा मनुष्य बिना टिकट सभा में प्रवेश न करे । इसका क्या प्रयोजन है? जहां कहीं सभा होती है यह विलसण नियम कहीं नहीं होता है। यहां… Continue Reading →

पवित्र पुस्ठक(pviter pustak)part8

अग्राह्य है तो विश्रान्तघाट खनौत पर जो बाग महाराज नंद गोपाल जी का है अथवा लालबहादुर लाल के बाग में जहा रुचि होवे वहां स्वीकार कीजिये और इन व्यर्थ वार्ताओं से हमारा समय व्यर्थ न गमाइये । रविवार को २… Continue Reading →

पवित्र पुस्ठक(pviter pustak)part7

सहाध्यायी उनके जो शिष्य है वे सब अद्यापि राजदारों में विद्या बल से प्रतिष्व पा रहे हैं और वह समाचार भी समस्त को मथुरा वासी श्रेष्ठ पुरियों मालूम है कि महाराज दष्डी जो नियमपूर्वक प्रतिदिन सप्तशती स्तोत्र का पाठ और… Continue Reading →

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