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स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)

‘कस की पितत के क्रम थे थे आज नाता से वर्णय काता हूं कि सवाधी की आज बहूत अच्छे हैं । अ्याखनस अवश्य देवेपे या पहा विलय हुआ। कोई रोया रही है। एक बाण के लिए ये चतुर हो और… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part8

लोगों के लिए दिया है. अब हुआ और भली भांति सजा हुआ है। चित्र दर्पण और कछ वस्तुएं असली भी जहां-तहां लटकी हुई हैं। टेबिल जी कोच, बैठने की वस्तुओं से कमरे सजे है ।दरी, मुंज की चटाई सर्वत्र फैलाई… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part7

माघाता मनी आर्यसमाज दरापर-इन सबको वेद पायका बन्द राखेका अपर। और जिगक पण जितना कदा होवे जैसराज गोटीराम सहकार तर्कवाद के पास कृपया मेजकर रसीद मंगा ले। मूलती समर्थटान बम्बई वाले तथा मुन्शी इंद्रमणि जी मुरादाबादी के पास मेरे बने… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part6

और संवाददाता वहां भी गया था। विभिन्न सम्प्रदायों के लोग एकत्रित े । इस सभा के अगले दिन प्रात:काल ला मदन मोहनलाल साहब के सम्बन्धियों में किसी स्त्री का देहान्त हो गया । चूंकि उपर्युक्त लाला साहब, सरस्वती महाराज के… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part5

कमेटी के सदस्यों के कर्तव्य न्यायाधीश कौन बने ?-फिर समाज’ के स्थान पर पधार कर बाबू दुगा्रसाद साहब रईस व आनरेरी मैजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद से बातचीत हुई। स्वामी जी ने पूछा कि यहां कमेटी के सदस्य कोन-्कौन है? बाबू साहब ने… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part4

क्यों रिन किया । हा पोपतीला में दस प्रजापति वा कश्यप को एक ही सब सन्तान मानने से पशुष्यवहार सिद्ध होता है। ये माने जाटा रहे । चौबीसवां सरल-गायत्री जाप से कोई फल है या नहीं और है तो क्यों… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part3

उत्तर–वेदों के अतिरिक्त हमारा कोई कपोलकल्पित मत नहीं है। फिर हमारे मत के अनुसार कोई केसे जन सकता है? क्या तुमने अंधेरे में गिरकर खाना-पीना मल मूत्र करना जती थोटी, अंगरखा घारकना, सोयना धर्म मान रखा है? काय वेद है… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part2

दसवां प्रश्न-जीव का क्या लक्षण है? उत्तर—न्यायशास्त्र में जीव का लक्षण इच्छा, द्वेष प्रयल, सुख, दुःख, ज्ञान लिखा है। ग्यारहवां प्रश्न-सूक्ष्म सूत्रों से ज्ञात होता है कि जत में अनन्त जीव हैं, तो फिर जल पीना उचित है या नहीं?… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)

जीवन में कर्म आदि भी अनादि है। चार मनुष्यों की आत्मा में थेदोपदेश करने का यह है कि उन के दशया ।। पृष्यात्मा जीव कोई भी नहीं था। इस से परमेश्वर में पक्षपात कछ नहीं आ सकता एठा प्रश्न-आपके मतानुसार… Continue Reading →

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