और संवाददाता वहां भी गया था। विभिन्न सम्प्रदायों के लोग एकत्रित े । इस सभा के अगले दिन प्रात:काल ला
मदन मोहनलाल साहब के सम्बन्धियों में किसी स्त्री का देहान्त हो गया । चूंकि उपर्युक्त लाला साहब, सरस्वती महाराज के
विश्वासियों में से हैं, उन्होंने महाराज से कहा कि जैसे आप कहें वैसे क्रियाकर्म किया जावे । स्वामी जी ने जो क्रियाकर्म
बताया वह अप्रवाल वैश्यों में प्रचलित प्रथा के विरुद्ध था, परन्तु उन्हीं के बतलाने के अनुसार आचरण किया गया और
उनके बहुत से वैश्य सम्वन्धी अपनी प्रथाओं से विरुद्ध होते देखकर उनके साथ सम्मिलित नहीं हुए। आजकल इस नगर
में गली-गली और घर-घर में सरस्वती महाराज की बातों ही कौ चर्चा हो रही है। पंडित बलदेवप्रसाद साहब, हेडमास्टर
जिला स्कूल-फरूखाबाद ने नगर के अन्य पंडितो के कहने पर पच्चोस प्रश्न लिखकर उन के पास भेजे थे । सुना गया है
कि उन्होंने उत्तर तो उसी दिन सब के दे दिये थे परन्तु यहां उनके पास नहीं आये हैं। सरस्वती महाराज ने ८ अक्तूबर को
केम्प फतहगढ़ में सभा की और उसी दिन वहां से कानपुर होते हुए पटना आदि की ओर चले गये और महाराज के
आदेशानुसार लगभग दो हजार रुपया पुस्तकों आदि के प्रकाशनार्थ इस नगर से एकत्रित हो गया और प्रति सप्ताह पडित
गोपाल राव हरि और अन्य लोग सरस्वती महाराज के कथनानुसार सभा किया करेंगे और उक्त पडित बलदेवप्रसाद साहब
ला० चुनीलाल साहब और अन्य व्यक्ति मूर्ति पूजा के समर्थन में सभा किया करेंगे।

सम्पादकीय टिप्पणी-पंडित बतदेवप्रसाद साहब हेडमास्टर जिला स्कूल के विषय में हमने तो सुना था कि बी०
ए० हैं परन्तु वे बी० ए० नहीं प्रतीत होते । एक बी० ए० द्वारा ऐसी चेष्टा का किया जाना असम्भव प्रतीत होता है। क्या
विचित्र बात है कि पंडित साहब ने जन्म-कर्म में एक ही तो सभा संगठित की ओर वह भी मूर्तिपूजा की। वही कहावत हुए
कि बहुत प्रसन्न हुई तो ईट मारी । वाह वाह, बी० ए० को खूब दर्गति को । गणित की पढ़ाई और सर विलियम हैमिल्टन
की फिलासफी का यह परिणाम निकला कि २५ प्रश्न मूर्तिपूजकों की ओर से स्वामी दयानन्द सरस्वती के विरुद्ध बना डाले।
प्रश्नों का महत्त्व तो इसी से प्रकट है कि आक्षेप करने वाले सज्जन एक मूर्तिपूजा समर्थक सभा के प्रधान है। इसी प्रछा
के समस्त बी० ए० शिक्षकों पर कलंक लगाते हैं प्रत्युत अपने अध्यापकों और कालिज के अपमान का भी कारण है। अब
हम हैडमास्टर साहब से विनयपूर्वक अनुरोध करते हैं कि यदि वे सब पढ़ा-लिखा भूल गये हो अर्थात् अंग्रेजी के कछ शब्दों
के अतिरिक्त और कुछ स्मरण न रहा हो तो अभी समय है फिर से उन्हीं पुस्तकों का अध्ययन आरम्भ करें और वर्ष अथवा
अनुमति ?
६ महीने में जब उनके अध्ययन से निवृत्त हों तो एकान्त में बैठकर अपनी बुद्धि से परामर्श करे कि मूर्तिपूजा उचित है या
हेडमास्टर साहब बड़े साहसी प्रतीत होते हैं क्योंकि उन्होंने इस बात की तनिक भी चिंता नहीं की कि ईश्वर नकरे
यदि इस बुद्धि पूर्ण सभा के प्रधान होने की सूचना डायरेक्टर साहब तक पहुंचेगी तो उनके मन में आपकी ओर से कैसे सुन्दर
विचार उत्पन्न होंगे? हे परमेश्वर l उनको शीघ्र सीधे मार्ग पर ला ।*

कानपुर(८ अक्टूबर सन् १८७९ से १६ अक्टूबर, सन् १८७९ तक)-स्वामी जी ८ अक्तूबर को फर्रुखाबाद
से लेकर उसी दिन यहां पधारे । यहां पर आकर उन्होंने निम्नलिखित विज्ञापन प्रकाशित किया

विज्ञापन पत्र-ठाकुर मुकुनद सिंह और मुन्ना सिंह आम मुकद्दमा के वास्ते मुख्तार हैं परन्तु पुस्तकें बेचने और रुपया
लेने के मुख्तार ये हैं-मुंशी समर्थन बम्बई वाले, मुन्शी इन्द्रमणि जी प्रधान आर्यसमाज मुरादाबाद, बख्तावरसिह मन्त्री ।
आर्य समाज शाहजहांपुर, ला० रामसरन दास प्रधान आर्य समाज मेरठ, ला० साईंदास मन्त्री आर्यसमाज लाहौर, ला०
बलदेव दास व डा० विहारीलाल मंत्री आर्य समाज गुरदासपुर, चौधरी लक्ष्मणदास सभासद् आर्यसमाज अमृतसर, बाब्
रामाधार वाजपेयी तार ऑफिस रेलवे लखनऊ पंडित सुन्दरलाल, रामनारायण पोस्टमास्टर जनरल पोस्ट आफिस