साँप च । म उस समय भटकर के चला गया। nu
एकत्रित हुए । विभिन्न विगयों पर बातचीत होती है ।
इन दिनों स्वामी जी को अतिसार के रोग ने इतना तग कारखा वा हि बाटनीत का
जाना पड़ता था। हम लोगों ने कहा कि आपके लिए किरी हाकटा को वन्तते हैं । कहा कि मेरी
और नहीं खाई। घटे दो घटे के पश्चात जब सब लोग चले गये तय वामी जी3 एकानुन हुदा १२
बुलाने के लिए जो यहां पैदा हुआ है, टच में कौन लोग रम्मितत है ? मंते सरी द्िन्साई ।इसमें ब्रगतियो के अठिरिक्ट
केवल दो नाम दूसरे थे और वे बंगाली भी सभी ब्रह्मसमाज के गदाग ३ । गामी जी ने गला बरत छ72
इन लोगों के भरोसे तुम्हें यह बोझ अपने ऊपर नहीं उठाना चाहिए या वयोंकि ये ग आ गो नि श्री कलर।
शत्र हो जायेंगे । यह तुमने भूल की जो ब्रह्म समाज के रटम्यों कात्रिश्वास दिदा कि ये किसी प्रकार की मरमट करे।
मैंने निवेदन किया कि आप कुछ विचार न क थे सहायता नकरेगे तो नैं अकेस्टा ही की मां के लिए पर्याद कर
कि मेरी यह इच्छा नहीं है कि मैं किसी अकेले को कष्ट दू।।

यहां आने पर दो-तीन दिन के विश्राम से अतिसार में कमी और श्रारोग्य तापहोने पर यो का शिक्षा
दिया गया और उसी मिस डक के बगल में स्वामी जी के व्याखयान आरम्भ हुए ।
पहला व्याख्यान ईश्वर विषय पर हुआ। इसमें ती-सौ के तगभन मनुष्य है। नटि मत का बटई

प्रकार खंडन किया।

दूसरा व्याख्यान वेद के ईश्वरकृत होने पर से । उसमें विशेषता यह हुई कि एक ओर बदल (रन में और
दूसरी ओर ‘कुरआन’ व । उस दिन ये पांच अंग्रेज-मिस्टर पारमर, मिटा गलर कर्नल ब्रायली निट ओर दिए
डाक्टर मारेसन भी उपस्थित थे। स्वामी जी ने बाइबिल और कुरआन दोनों के मिट्टी
शाश्वत युझिय में
दुष्ट
खंडन किया । ढाई घंटे तक व्याख्यान होता रहा। पांच सौ के लगभग मनुष्य के दिन काठ होते त्यो
साहब को बहुत आवेश आया परन्तु फिर भी ्याख्यान की समाप्ति तक नियत्रण किये मंर वैट से ब डे
समाप्त होने पर एकदम आवेशपूर्वक बोल उठे, पडित जी ने केवल धूल उई और अपने वेटनर को इनमें
तिया।’वह शब्द नंकि क्रोध की अवस्था में कहे गये थे इसलिए महीन देर तमिने उकि
पंडित को वेद के सिद्धान्त वर्णन करते नहीं सुना । क्या बही (टन सिद्धन्टों से) पर्विट हैं? इसके पर्नाद बढदि दे
जिन सिद्धान्तों का स्वामी जी ने खंडन किया था, उनको पादरी साहब सिद्ध करते लगे। जब पटरी सबसलर
तब स्वामी जी खड़े हुए। पादरी महोदय ने क्रोध की दशा में जो अनुदित शब्द कहे थे उन पर दर्न ने छन ।
केवल उनके उपस्थित किये हुए प्रमाणों का खंडन किया। इस लडनको पादरी साहव सुन नसत दे रजः
के मारे चिल्ला-चिल्ला उठते थे। यहां तक कि (स्वय) मिटर पारमर ने अंग्रेजी श में दो सत्र में विट
मारेसन ! जिस योग्यता और नग्नता के साथ व्याख्यानदाता अपने दावे को सिद्ध करता है उसी तम दिन क्रोध
भरे शब्दों से रोकना चाहते हो? यह बात मेरी सम्मति में अच्छी नहीं। वहिये टो यह कि जिम और टूटनिन्दर के
साथ वह अपने दावे की सिद्धि और आपके ढडन में यूक्तियां देठे हैं. उअप भी दें।’

इसके उत्तर में पादरी साहब ने यह कहा कि मै बनवतरूप से उठर दे रह हूं। दिन से छ
होते तो तुम भी इनके साथ मिल जाओ। यह करा और क्रोध में कर चले गदे और तैर अब बेटे रे