सिए प्राणों को मस खिलाना चाहिये परनु ये नहीं खते । इसतो रए प्रकट है कि अपने का से सवर्ततराक मिलता है,
ग्रगकत्ाद्ध से गहीं । गोरका पर भी व्याखयन दिसा भा जिस विजाएमूर्वक उसके लाजी का सर्णन विया था नियोग और
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बिलकुल नहीं है। मेरा छोटा भाई रासस । गीदते ॥ ४
सहायक है।
होती रही और आम निरसन ने आर्थसामान्र जी र्मापित किया हजा है। हम लेोग राय प्रकार से उनके

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भद्रा बिलकुल नहीं कराई और प्रायः दात 01 से राम ||| 3 | मरने पर भी उन
वेदोवत रीति से करने की आश दी परं (१) को नहीं रहा। उनका गर्ग१२ गत), सन् १८८९यो
पण्डित रामसहाय आदि गौड़ ने थर्ण (या था। रेवाड़ी inter उनके रामने नहीं आया। जब ये आठ
दिन व्याख्यान दे चुके तब हाने और रागरेवक गुजराती पंडित ने मिलकर उन गो पत्र लिखा कि आप हनुमान मन्दिर में
पधार, यहां हमारा और आपका सम्भाषण होगा । रामा जी ने मौखिक उतर भेजा कि हमको हनुमान जी मन्दिर में आकर
कोई हनुमान नहीं करना है । तुमको जो कुछ पूछना है वहां चले आओ पर ४
गते ।।
गंगा प्रसाद दास” ने वर्णन किया‘ना एक दिन श्याम जी से कहा कि हाराज | बागाय के थरे में पंडित
लोग कहते हैं कि ब्राह्मण के अतिरिक्त किसी को इसका अधिकार नहीं । इस में आपकी घयासामति है? कहा कि वाहाण,
क्षत्रिय, वैश्य तीनों वणं के लिए गायत्री और संध्या करना है और एक ही गायत्री राय के लिए है। तुम सीखो, हम
तुम को उपदेश करेंगे और स्वामी जी ने एक परतव पंचमहायज्ञचिधि’विना मुल्य हाम को दी और बागायत्री कण्ठरश
कराई। दूसरे दिन जब महसे सनी तो मेरा उच्चारण शुद्ध नहीं था। तब एक पटे तक मुझे शुद्ध उच्चारण कराया जो अव
तक कण्ठस्थ है। नगर के ब्राह्मण ने मह से कहा कि यह बागायत्री नहीं। तब रामी जी ने हर कहा कि जो कोई कहे
यह ब्रह्मगायत्री नहीं है, उससे कहना कि योगी जी तुम को बुलाते हैं, वहीं चली। दूसरे, यह कि तुम उनके रामने पढ़ो,वे
पढ़ने से त्द्ध होंगे। नि आकर ऐसा ही कहा परन्तु कोई भी गेरे साथ न गया । एक मनुष्य ने मदा को कहा था कि इसके
पढ़ने से पाप होता है। ख्यामी जी ने मुझे पत्र दिया। कि, जो पाप हो चह मुदन को और जो पुण्य है चह तुझ को । यहां का
कोई पंडित उनके सामने न आया ।

एक राधा ने कहा कि मैं ब्रहम हू।(सुन कर रयागी जी) प्रशम तो मौन रहे फिर कहा कि श्यर नै गर्य, चन्द्र १
आदिको बनाया। तू एक दाथ भर पृथिवी अधर (थायु में लटकती हुई) रच कर यदि हम को यतलावे तो हम तुझको परपेश्वर
माने । मय लोग हंस पड़े और वह मौन हो गया।’