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स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part8

की। हमने कहा कि यदि हराया है तो एक बार फिर हरा दो । रामलाल और नन्दलाल दोनों भाइयों ने (जिन के मकान में रखामों जी उतरे हुए थे कहा कि इनके कहने से व्या लाभ है ? यदि हराया… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part7

ने कहा कि किसी के साथ खाने या न खाने में हम अधर्म नहीं मानते। ये सब बाते देश और जाति की प्रणा से सम्बन्ध रखती है, वास्तविक धर्म से नहीं। जो समझदार है वे भी बिना आवश्यकता अपने देश… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part6

हमने एक दिन स्वामी जी से प्रश्न किया कि ईश्वर अरूप है, उसका रूप क्योकर देखें? जब उसका नाम । तो उसका कुछ रूप भी होगा। जिस प्रकार परमाणु समस्त आकाश में उड़ रहे हैं परन्तु कपल सूरज की किरण… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part5

| उसके१न्त ज्ञान ना ।वास्व ३ और आध्यात्मिक बात ६ नवम्बर सन् १८०९शेमैनेजर के नाम पत्र लिखते है–जबकतदानापूर में प्रतिदिन व्याख्यान १ पांचवा दिन है। यह समाज और समाज के पुरूष बहुत उत्तम हैं। समाज का प्रबन्ध भी बहुत उत्तम… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part4

एक दिन मुसलमानों ने शरारत को ध्यान से स्थान के बहत ही समीप एक मीलवी वाइज को रखड़ा कर क्या । हिन्दू भी उसके साथ मिले हुए धे वयोकि गत चतजमेरो काग में बहुत चतुर है। यह मौलवी इतना असभ्य… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part3

जाल यहा पर बहुत से लोग गाड़ी और टमाटर लेकर वहाँ पहंच गये थे मानो एक प्रकार का मेला शा। लट पर लगभग १५ मनुष्य थे । मार्ग में बाजार के दोनों ओर हजारों मनुष्य वे। जोड़ी में चढ़कर यहाँ… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)part2

“फिर हमने सभा की ओर से एक पत्र छेदीलाल को लिखा कि स्वामी जी की कोई और पुस्तक है या नहीं? छेदीलाल ने उत्तर दिया कि सुना है कि लाजर के यहां ही बनाई ‘धेदभाष्यभूमिका’ छपती है जिसा पर हम… Continue Reading →

स्वामो जी भाषण(svami ki bhasn)

‘कस की पितत के क्रम थे थे आज नाता से वर्णय काता हूं कि सवाधी की आज बहूत अच्छे हैं । अ्याखनस अवश्य देवेपे या पहा विलय हुआ। कोई रोया रही है। एक बाण के लिए ये चतुर हो और… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part8

लोगों के लिए दिया है. अब हुआ और भली भांति सजा हुआ है। चित्र दर्पण और कछ वस्तुएं असली भी जहां-तहां लटकी हुई हैं। टेबिल जी कोच, बैठने की वस्तुओं से कमरे सजे है ।दरी, मुंज की चटाई सर्वत्र फैलाई… Continue Reading →

ज्ञान सत्य(Gyan stya)part7

माघाता मनी आर्यसमाज दरापर-इन सबको वेद पायका बन्द राखेका अपर। और जिगक पण जितना कदा होवे जैसराज गोटीराम सहकार तर्कवाद के पास कृपया मेजकर रसीद मंगा ले। मूलती समर्थटान बम्बई वाले तथा मुन्शी इंद्रमणि जी मुरादाबादी के पास मेरे बने… Continue Reading →

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